तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसुल्तान मुस्कुराया, “यही मेरे अन्नदाता हैं!” महाराज ने पूछा, “कैसे?” और एक स्वर्णमुद्रा सुल्तान की हथेली पर रख दी। “जो आता है वह इन गधों के बारे में ही बातें करता है।” सुल्तान ने मुस्कुराते हुए कहा। महाराज ने एक स्वर्णमुद्रा और उसकी हथेली पर रखी और पूछा, “इन गधों में ऐसी क्या विशेषता है?” “आज का इनसान जिन सूक्ष्म तरंगों को व्यवहार में लाता है वह सब कुछ!” “जैसे?” पूछते हुए महाराज ने एक स्वर्णमुद्रा बढ़ाई मगर सुल्तान ने अपना हाथ वापस खींच लिया और महाराज के सामने पाँच स्वर्णमुद्राएँ गिनकर अपनी जेब में रख लीं। महाराज समझ गए, अब सौदागर सुल्तान बातें नहीं करेगा। तब उन्होंने तेनाली राम की ओर देखा। तेनाली राम ने सौदागर की हथेली पर पहली स्वर्णमुद्रा रखते हुए कहा, “पहले गधे पर क्या लदा है?” “राजा-महाराजा के उपयोग में आनेवाला अत्याचार!” सुल्तान ने उत्तर दिया। “दूसरे गधे पर?” तेनाली राम ने सुल्तान की हथेली पर एक स्वर्णमुद्रा और रखी। “पंडितों और विद्वानों के काम आनेवाला अहंकार!” सुल्तान ने उत्तर में कहा। तीसरी स्वर्णमुद्रा हथेली पर रखते हुए तेनाली राम ने पूछा, “और तीसरे गधे पर?” सुल्तान ने उत्तर दिया, “धनवानों के काम आनेवाला ईर्ष्या भाव!” चौथी मुद्रा सुल्तान की ओर बढ़ाते हुए तेनाली राम ने पूछा, “चौथे पर?” “अधिकांश के उपयोग में आनेवाली बेईमानी।” तेनाली राम मुस्कुराया और एक स्वर्णमुद्रा पुनः सुल्तान की हथेली पर रखते हुए कहा, “और पाँचवें गधे पर?” “औरतों के काम आनेवाला छल, कपट और प्रपंच।”