तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
पृष्ठ 6, कुल 118 में से
संदर्भ में पढ़ेंकहा नहीं। उन्होंने तेनाली राम को दो थैलियों में स्वर्णमुद्राएँ और दो प्रहरी उपलब्ध करा दिए। तेनाली राम उन्हें लेकर राजभवन से बाहर राजमार्ग की ओर, महाराज की आज्ञा लेकर, चल पड़ा। महाराज से चलते समय उसने कहा, “महाराज, आप मुझे शुभकामना दें कि कल शाम तक मैं प्रमाण सहित अपनी बातें सिद्ध कर सकूँ।” तेनाली राम ने दोनों प्रहरियों को व्यापारी वेश में अपने घर आने का निर्देश दिया और स्वयं अपने घर चला गया। वह अपने साथ स्वर्णमुद्राओं की थैलियाँ भी लेता गया। ऐसे अवसर पर तेनाली राम बहुत सजग हो जाया करता था। उसके रन्ध्र-रन्ध्र में सजगता उत्पन्न हो जाती थी यानी वह सहस्रनेत्रधारी बन जाता था। लोग उसके इसी गुण के कारण ही उसे 'चक्षुश्रवा' और 'प्रज्ञाचक्षु' आदि विशेषणों से सम्बोधित किया करते थे। उसके घर पहुँचने के थोड़ी देर बाद ही दोनों प्रहरी व्यापारियों के बाने में उसके घर पहुँचे। तेनाली राम उन्हें लेकर विजयनगर के बाजार में चला आया और देर तक इधर- उधर टहलता रहा। वापसी के समय उसने दोनों प्रहरियों को एक-एक स्वर्णमुद्राओं की थैली थमा दी और एक को एक धनी व्यापारी के आगे चलते हुए थैली कहीं सुनसान इलाके में गिराकर चले जाने को कहा। उसने प्रहरी को उस धनी आदमी को भी दिखा दिया जिस धनी आदमी के आगे उसे चलना था। सम्भवतः तेनाली राम उस धनी आदमी को पहचानता था और जानता भी था कि वह कहाँ रहता है। पुनः दूसरे प्रहरी को एक गरीब आदमी के आगे-आगे जाने का उसने निर्देश दिया और प्रहरी को बता दिया कि उस गरीब आदमी का गन्तव्य क्या है। इस प्रहरी को भी तेनाली राम ने सुनसान स्थान पर थैली इस तरह गिराने को कहा जिसे वह गरीब आदमी देख ले...। अपनी व्यूह-रचना तैयार कर लेने के बाद उसने दोनों प्रहरियों को यह निर्देश भी दिया कि वे दोनों थैलियाँ गिरा देने के बाद तेजी से आगे जाएँ और कहीं छुप जाएँ। जब उनका 'शिकार' राह में गिरी थैली लेकर बढ़े तब वे उनका पीछा करें और देखें कि वे थैली का क्या करते हैं! अपने द्वारा दिए गए निर्देशों से तेनाली राम सन्तुष्ट था। उसे विश्वास था कि आज रात में ही उसे वांछित प्रमाण प्राप्त हो जाएगा। दोनों प्रहरियों को विदा करने के बाद तेनाली राम अपने घर लौट आया। दूसरे दिन, सुबह ही दोनों प्रहरी तेनाली राम के घर पर पहुँच गए। वह उस समय दरबार जाने के लिए तैयार हो रहा था। उसने प्रहरियों से पूछा, “क्या समाचार लाए हो?”