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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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एक प्रहरी ने तेनाली राम से कहा, “श्रीमान, मैं आपके निर्देश पर जिस व्यक्ति के पीछे गया था उसका नाम गिरधारी लाल है। उसकी बाजार में सोने-चाँदी के जेवरों की दुकान है। बहुत पैसेवाला आदमी है वह।” अभी उसकी बात पूरी नहीं हुई थी कि तेनाली राम ने उसे टोक दिया, “अरे भाई! मैंने तुम्हें किसी के पीछे नहीं भेजा था-आगे भेजा था। ठीक से सारी बातें बताओ।” “क्षमा करना श्रीमान! भूल हो गई!“ प्रहरी ने कहा और कल शाम को घटित घटना बताने लगा, “श्रीमान! जब मैं उस आदमी, मेरा मतलब है कि गिरधारी लाल के आगे- आगे चलते हुए कदम्ब पेड़ के पास पहुँचा तो मुझे राह पूरी तरह खाली दिखी। सुनसान रास्ते पर दो ही मुसाफिर थे-मैं और वह। मैं उससे मात्र चार कदम की दूरी पर था। मौका देखकर मैंने कमर में खोंसी हुई स्वर्णमुद्राओं की थैली गिरा दी और सामान्य चाल से आगे बढ़ता रहा, मानो मुझे थैली गिरने का भान ही नहीं है। कुल चार कदम चलकर मैंने अपनी गर्दन पीछे की ओर हल्के से घुमाई तो पाया, वह व्यक्ति नीचे गिरी थैली उठा रहा था। मैंने अपनी गति बढ़ा दी। थैली उठाने के बाद वह थोड़ी धीमी गति से चलने लगा। मैं तेज चलता हुआ राह में आए एक पेड़ की ओट लेकर खड़ा होकर उसकी प्रतीक्षा करने लगा। जब वह उस पेड़ से थोड़ा आगे निकल गया तब मैं भी पेड़ की ओट से बाहर निकलकर उसका पीछा करने लगा। वह आदमी हल्दी बाजार के निकट बसे कुलीनों के मुहल्ले में बने गुलाबी मकान में रहता है। उसके घर की बाहरी दीवार पर उसका नाम खुदा हुआ है- गिरधारी लाल। मैंने घर के चारों ओर छोड़ी गई खुली जमीन का लाभ लिया और एक कमरे की खुली खिड़की से अन्दर झाँका तो पाया कि गिरधारी लाल थैली से स्वर्णमुद्राएँ निकालकर गिन रहा है। उसने मुद्राएँ गिनकर उन्हें थैली में रखा और आसमान की ओर हाथ जोड़े कुछ देर तक खड़ा रहा फिर स्वर्णमुद्राओं की थैली को कमरे में लगी तिजोरी में रखा। तभी एक वृद्ध व्यक्ति उस कमरे में आया और पूछा, ‘क्या बात है गिरधारी? तुमने हाथ-पाँव भी नहीं धोए और कमरे में चले आए? तुम्हारा स्वास्थ्य तो ठीक है?’ प्रतिउत्तर में उसने क्या कहा, मैं नहीं सुन पाया।“ तेनाली राम ने उस प्रहरी की पीठ थपथपाई और दूसरे प्रहरी की ओर देखकर पूछा, “तुम्हारा समाचार!” उस प्रहरी ने कहा, “श्रीमान, मैं जिस व्यक्ति के पीछे गया था वह बहुत गरीब और ईमानदार आदमी है। हल्दी बाजार के पश्चिम में बसे मछुआरों की बस्ती में रहता है। जब मैं उसके आगे चलते हुए एक स्थान पर थैली गिराकर आगे बढ़ा तब उसने आवाज लगाई-‘अरे भाई साहब! आपकी थैली!’ मैंने उसकी आवाज अनसुनी कर दी और तेजी से आगे बढ़ने लगा और वह हाथ में थैली लिये लगभग दौड़ता हुआ, ‘भाई साहब, भाई साहब’ पुकारता रहा। अभी वह दो-चार कदम ही दौड़ पाया था कि उसके पाँव में किसी चीज से ठोकर लगी और वह गिर पड़ा। उसके हाथ से थैली छिटक गई और उसमें से स्वर्णमुद्राएँ निकलकर सड़क पर बिखर गईं। तब तक मैं सड़क के पास के एक गड्ढे में जाकर छुप गया।