भारतकोश
तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 118 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 8

थोड़ी देर बाद वह आदमी हाथ में थैली लिये, इधर-उधर देखता हुआ तेज कदमों से जाता दिखा। सम्भवतः वह मुझे ही तलाश रहा था। मैं थोड़ी देर के बाद उस गली से निकला और उससे कुछ दूरी बनाकर चलने लगा। जब वह व्यक्ति अपने घर पहुँच गया तब चटाई पर बैठकर उसने स्वर्णमुद्राएँ गिनीं। उसने एक कपड़े के टुकड़े में थैली बाँधकर अपने हाथ में ले ली और उसने कहीं जाने के लिए निकल गया। मैंने समझा कि जरूर वह स्वर्णमुद्राओं को छुपाने के लिए जा रहा होगा लेकिन वह अपने घर से सीधे राज्य कोषागार पहुँचा और सौ स्वर्णमुद्राओं की वह थैली वहाँ जमा कराकर पर्चा कटवाया। उसके बाद वह अपने घर चला आया। राज्य कोषागार में उसने पर्चे पर अपना नाम रामानुजम् लिखवाया है। तेनाली राम ने उस प्रहरी की भी पीठ थपथपाई और उन्हें सीधे राजभवन पहुँचने का निर्देश देकर भोजन के लिए अपने घर के भीतर चला गया। "महाराज! आपको अब अधिक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी! आप कृपा कर राज्य कोषागार से यह पता कराएँ कि राजमार्ग में पड़ी सौ-सौ स्वर्णमुद्राओं की दो थैलियाँ क्या किसी को मिली हैं? और राज्य कोषागार में यदि इस तरह की थैलियाँ जमा कराई गई हैं तो जमा करानेवाला कौन था?" “अरे!“ महाराज चैंक पड़े। "क्या बात हो गई तेनाली राम! तुम शेष सभासदों के आने की प्रतीक्षा भी नहीं करना चाहते?“ उन्होंने तेनाली राम से कहा। "महाराज!" तेनाली राम ने विनम्रता से कहा, "जिन दो प्रहरियों की सेवाएँ मैंने ली थीं, वे दोनों रात भर जगे रहे हैं। मैं उनकी सेवाएँ वापस करने के उद्देश्य से ही सभा शुरू होने के समय से पहले पहुँच गया हूँ। कल जो पहेली सुलझाने का जिम्मा आपने मुझे सौंपा था उसके लिए 'प्रमाण' प्राप्त कर लेने के उद्देश्य से मैं सक्रिय हुआ हूँ। कृपया वांछित सूचनाएँ मँगाने में मेरा सहयोग करें। यदि आप निर्देश देंगे तो सूचना अतिशीघ्र प्राप्त हो जाएगी। और सभासदों के आने पर इन दोनों प्रहरियों को मुक्ति मिल सकेगी ये दोनों प्रहरी मेरे शोध के प्रमाण भी हैं और प्रत्यक्षदर्शी भी।" महाराज कृष्णदेव राय समझ चुके थे कि तेनाली राम ने गरीबी और ईमानदारी का सम्बन्ध स्थापित करने का कोई सूत्र अवश्य पा लिया है। उन्होंने राज्य कोषागार से सूचना मँगाई। सूचना पत्र में लिखा गया था कि रामानुजम् नाम के एक व्यक्ति ने सौ स्वर्णमुद्राओं की एक थैली राज्य कोषागार में कल मध्य रात्रि से पूर्व जमा कराई है। यह थैली उसे राजमार्ग से हल्दी बाजार जानेवाली राह पर मिली थी। रामानुजम् हल्दी बाजार के पास मछेरों की बस्ती में रहता है और मधुमक्खियों के छत्ते से मधु निकालने का कार्य करता है। महाराज ने सूचना-पत्र का अवलोकन कर उसे तेनाली राम को सौंप दिया।

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · पृष्ठ 8, कुल 118 में से · BharatKosha