तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)
पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा
स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसम्मान करते हैं। वे चाहें तो पूरे खेत की फलियाँ तोड़ लें, कौन रोक सकता है उन्हें मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया...’ और इसी तरह की अनेक बातें सोचता हुआ वह दौड़ पड़ा उधर जिधर महाराज के विश्राम के लिए तम्बू गाड़ा गया था। महाराज के पास पहुँचकर वह किसान साष्टांग दंडवत् की मुद्रा में आया तथा महाराज से कहा, “महाराज! प्रजापालक! आपको देखकर मेरे नयन तृप्त हुए। यह राज्य आपका, यह खेत आपका, आप प्रजापालक, मैं आपकी प्रजा। मुझसे आज्ञा लेने की कोई आवश्यकता आपको नहीं थी मगर फिर भी आपने एक गरीब किसान के श्रम का जो महत्त्व दिया है उसके कारण सदियों तक पृथ्वी पर आपकी न्यायप्रियता की स्मृति रहेगी।” इसके बाद वह किसान खुद सिपाहियों के साथ खेत में गया और फलियाँ तोड़कर महाराज के समक्ष श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत किया और फिर महाराज से आज्ञा लेकर गाँव लौट गया। पुनः थोड़ी देर के बाद वह आया। उसके साथ गाँव के कुछ लोग थे जो अपने साथ तरह- तरह के पकवान लाए थे-महाराज के लिए और महाराज के अनुचरों के लिए। इतने सम्मान की कल्पना महाराज ने नहीं की थी। तेनाली राम यह सब देखकर मुस्कुरा रहा था। दूसरे दिन जब महाराज वहाँ से अगले पड़ाव के लिए कूच करने लगे तब तेनाली राम का घोड़ा उनके घोड़े के साथ-साथ चल रहा था। महाराज कृष्णदेव राय ने तेनाली राम से कहा, “तेनाली राम! तुम्हारे कारण कल रात अच्छा भोजन प्राप्त हुआ। अब आगे देखें क्या होता है!” तेनाली राम ने कहा, “आगे भी अच्छा ही होगा...और महाराज! इस गाँव के लोग वर्षों आपका गुणगान करेंगे और आपकी न्यायप्रियता एवं ईमानदारी की कथाएँ कहेंगे जबकि आप जानते हैं कि आपने इनका लिया ही है, दिया कुछ नहीं!”