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तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ)

पण्डित तेनाली रामकृष्णन / लोक संकलन द्वारा

स्रोत: तेनालीराम की अनोखी दुनिया (बुद्धिमत्ता एवं हास्य कथाएँ) · भारतीय लोक साहित्य संकलन · 1950 (उद्गम)

DevanagariHindipublished118 पृष्ठ

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सब कुछ सुनने के बाद तेनाली राम ने महाराज से कहा, “महाराज! जो हो गया, उसके लिए पश्चात्ताप नहीं। असल में आपके जामाता पुस्तकों में ही रमे रहे हैं। उन्हें बाह्य जगत की व्यावहारिकता का बोध नहीं है जिसके कारण वे वैसी बातें भी कह देते हैं जो लोक- व्यवहार के अनुकूल नहीं। लेकिन विश्वास करें, यह समस्या अब एक-दो दिन की मेहमान है। अब तक मैं इसी समस्या के समाधान के लिए अपने ढंग से प्रयास करता रहा हूँ। कल शाम को आप जामाता के साथ हमारे घर पधारें। अभी तो थोड़ी देर के लिए उन्हें बुलवाएँ ताकि मैं स्वयं उन्हें आमंत्राण दे दूँ।“ महाराज को तेनाली राम पर विश्वास था। इसलिए स्वयं जाकर वे अपने दामाद को लेकर अपने कक्ष में आए, जहाँ तेनाली राम उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। महाराज ने अपने दामाद का परिचय तेनाली राम से कराया। तेनाली राम ने महाराज के दामाद को अपने गले से लगाया। फिर अपने झोले में हाथ डालकर एक छोटा-सा फल निकाला बोला, ”हम लोगों के यहाँ की परम्परा है कि जब हम दामाद से पहली बार मिलते हैं तो उसे अपने हाथों से फल खिलाते हैं।“ उसके अनुरोध पर महाराज के दामाद ने मुँह खोला और तेनाली राम ने वह फल उसके मुँह में डाल दिया। फल कड़वा था। महाराज का दामाद उसे थूकना चाह रहा था मगर तेनाली राम ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। अन्ततः दामाद को वह फल निगलना पड़ा। फल निगलने पर कड़वेपन के कारण उसका मुँह विकृत सा हो उठा जिसे देखकर तेनाली राम ने कहा, “अरे! तुम अपने इस सुन्दर मुँह को विकृत क्यों कर रहे हो...देखो, सामने आईने में कैसा लग रहा है तुम्हारा चेहरा!” दामाद ने कहा, “इतना कड़वा फल खिलाया आपने तो उसका प्रभाव चेहरे पर पड़ेगा ही।” तेनाली राम ने कहा, “अरे पुत्र! कड़वा-मीठा का सम्बन्ध तो जीभ से है। उसका चेहरे पर भला असर क्यों होगा? खैर, जाने दो। अब यह फल खाओ।“ इस बार तेनाली राम ने एक दूसरा रसदार छोटा फल दामाद के मुँह में डाल दिया। दामाद का चेहरा फल मुँह में रखते ही खिल गया। तेनाली राम ने कहा, “यह फल कैसा है?” “अच्छा!” दामाद ने उत्तर दिया। इसके बाद तेनाली राम ने महाराज और उनके दामाद को अपने घर आने का आमंत्राण