भारतकोश
त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

त्रिपुरारहस्य (ज्ञान खण्ड - महर्षि दत्तात्रेय-परशुराम संवाद सान्वय सटीक)

Tripura Rahasya Jnana Khanda with Hindi Commentary

महर्षि दत्तात्रेय / भगवान् परशुराम द्वारा

DevanagariHindipublished404 पृष्ठ

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३८२ त्रिपुरारहस्ये ज्ञानखण्डे नाथ शृणु ११५ | निर्वाणं २०४ | पत्न्या ६७ नाऽनुवृत्ति १८५ | निर्विकल्पं २४४ | पप्रच्छ २२४ नान्यद्विजा ११ | निर्विकल्पं २७८ | पप्रच्छ २०५ नारदं २९९ | निर्विकल्प २३६ | पप्रच्छ ३०८ नाविदं ४६ | निर्विकल्प १६४ | परतत्त्व १४१ नाऽसाध्यं १६५ | निर्विकल्पक २४४ | परन्तु ६ नास्ति २३६ | निर्विकल्पक २४४ | परमामापदं २२ नास्ति चेत्यं १४२ | निर्विकल्पा २४७ | परमार्थफल २८ नास्त्येव ३२० | निर्विण्णो १६४ | पररूपे १०६ नाहं तदशकं १४ | निर्हेतु १०० | परश्रेयो २१ नाहमद्यावधि ४६ | निर्हेतुकत्व १०० | परा चितिर्मे ११२ नित्यनैमित्तिक ५ | निवृत्तितस्तस्य २४४ | पराद्वये २७० नित्यमुक्ता ३१४ | निवेश्य ४४ | परावरज्ञं ३४६ निदर्शनं ७ | निशीथे २० | परा सा ३१२ निदर्शनं ९८ | निश्चिता २३५ | परा मा या २९५ निदर्शनं १८८ | नूनं तदष्म ७९ | परिच्छेदा २७६ निद्राजा १३० | नूनं प्रिये ८४ | परिच्छेदो २७३ निद्राप्रकाश २३५ | नूनमेते ११८ | परिच्छिन्ना १८६ निनाय ६६ | नूनमेषो १११ | परित्यक्तो १७२ निन्द्यवृत्तं ७६ | नृणां कर्त्तव्य ९८ | परित्यज १७२ निमज्जितास्तु २१३ | नृपैष १७० | परित्यज्या २०६ निमित्ततो ४३ | नेतद्व्यस्तं १७१ | परिभूतं २१७ निमील्य १३५ | नेत्रं सुसा १९४ | परिहृत्य २२१ नियति १०१ | नेत्रे १३२ | परीक्ष्यै ८२ निगन्तरं ६० | नैतत्तर्केण २१८ | परोक्षवृत्ति ६० निरुपादान १५१ | नैतद्विज्ञान २ | पर्वताग्रबुद्धि १८६ निरूपणं ३३१ | नैतस्य १६५ | पश्यन् १२८ निरूपणे २७५ | नैतावदेव १६ | पश्य प्रत्या २२७ निरूप्य ८८ | नैषां ज्ञानस्य २९८ | पश्य ब्रह्मन् २४८ निरोधे २५५ | नोक्ता चिकि ५७ | पश्य सर्वत्र १३८ निर्गतायां २२३ | नो चेन्न स्या ४४ | पश्यात्मान १६१ निर्गम्य १६३ | नोपभोक्तुं ५६ | पश्याऽहं १६६ निर्जने ३० | नोन्मार्जितं २८० | पश्येषदन्तः १३१ निर्जितान् ३३८ | न्यवसच्छा ८६ | पश्यैन्द्र १५६ निर्दयाश्च ९८ | न्यवसत् ७० | पश्यैवेमेष १७६ निर्भयः ३४४ | प | पांशुभिर्नभ २९ निर्भयः ३४५ | पक्वध्याने २५१ | पादप्रक्षाल १०९ निर्भयो ३२७ | पठतां ३२८ | पिङ्गकेशाः ४९ निर्वाणं २७८ | पठिता १२५ | पुंसो वपुर ५०