भारतकोश
उत्तर गीता (आदि गौड़पादाचार्य दीपिका एवं सान्वय हिन्दी टीका)

उत्तर गीता (आदि गौड़पादाचार्य दीपिका एवं सान्वय हिन्दी टीका)

Uttara Gita with Gaudapadacharya Dipika and Hindi Commentary

आदि गौड़पादाचार्य / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished86 पृष्ठ

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५६ उत्तरगीतायां कर्णपार्श्वे वामकर्णसमीपे गन्धवती गन्धवतीपुर्याख्या वायो- र्लोकः प्रतिष्ठितः अस्तीत्यर्थः ॥ किंच-- सौम्या पुष्पवती सौम्ये सोमलोकस्तु कण्ठतः । वामकर्णे तु विज्ञेयो देहमाश्रित्य तिष्ठति ॥ २४ ॥ सौम्ये उत्तरदिशि कण्ठतः कण्ठदेशादारभ्य वामकर्णे वामश्रोत्रे सौम्या कुबेरसंबन्धिनी पुष्पवती पुष्पवत्याख्या सोमलोकः एवं देहमाश्रित्य तिष्ठतीति विज्ञेयः ॥ किंच-- वामे चक्षुषि चैशानी शिवलोको मनोन्मनी । मूर्ध्नि ब्रह्मपुरी ज्ञेया ब्रह्माण्डं देहमाश्रितम् ॥ २५ ॥ वामे चक्षुषि वामनेत्रे ऐशानी ईशानसंबन्धिनी मनो- न्मनी मनोन्मनीपुर्याख्यः शिवलोकः शिवावासभूतो लोकः