भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri डा. रमाकान्त शुक्लः                                                              आवासः एम.ए. (हिन्दी-संस्कृतयोः) पीएच.डी.                      'रमालयः' - आर-6, वाणी विहारः, साहित्याचार्यः, सांख्ययोगाचार्यः                                             नई दिल्ली - 110059 राष्ट्रपतिसम्मानितः संस्कृतविद्वान्                                      दूरभाष: 011-28561846 सम्पादकः, अर्वाचीनसंस्कृतम् (त्रैमासिकम्)                             मो. - 09560532392 महासचिवः, देववाणी-परिषद्, दिल्ली अध्यक्षः, भारतीयसंस्कृतपत्रकारसङ्घः शास्त्रचूड़ामणिविद्वान्, राष्ट्रियसंस्कृतसंस्थानम्                                                                                दिनांक- १५/०७/२०११

अभिनन्दन

मुझे यह जानकर अत्यन्त हर्ष हुआ कि संस्कृत वाङ्मय की लब्ध प्रतिष्ठ विदुषी डा. (श्रीमती) अन्नपूर्णा मिश्रा द्वारा अत्यन्त परिश्रम से ग्रथित 'वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता और अखण्डता' शीर्षक दस अध्यायों का शोधग्रन्थ प्रकाशित हो रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्वीकृत इस बृहत् परियोजना में डा. मिश्रा ने वेदों, उपनिषदों, ब्राह्मणों, आरण्यकों एवं कल्पसूत्र आदि का परिचय देने के साथ राष्ट्र और उसकी एकता और अखण्डता के विषय में वैदिक दृष्टि का सप्रमाण विवेचन कर महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष दिये हैं। डा. मिश्रा ने अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेकर अपने वैदुष्य से विद्वज्जगत् को प्रभावित किया है। उनके निर्देशन में अनेक शोधकार्य हुए हैं जिनमें आपकी निर्देशनपटुता प्रतिबिम्बित होती है। उनका दीर्घकालीन विद्याव्यासंग का अनुभव इस ग्रन्थ में आद्यन्त झलकता है। प्रस्तुत शोध-ग्रन्थ डा. मिश्रा के दीर्घकालीन चिन्तन-मनन का परिणाम है जो कालातीत और सनातन वैदिक वाङ्मय की उस काल में विशेष प्रासंगिकता रेखांकित करता है जिसमें राष्ट्र की एकता, अखण्डता, सुरक्षा, समृद्धि और पुष्टि विशेषतः अपेक्षित है। मैं इस ग्रन्थ की रचना के लिए डा. मिश्रा का अभिनन्दन करता हूँ।                                                                                      [हस्ताक्षर] गुरुपूर्णिमा, आषाढ़ शुक्ल १५ वि.सं. २०६८                 (रमाकान्त शुक्ल) CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar