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वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 110, कुल 353 में से

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पृष्ठ 110

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri 82 वैदिक वाङ्मय में राष्ट्रीय एकता एवं अखण्डता थी। पश्चिमी समुद्र आज भी वर्तमान है। उत्तरी समुद्र उत्तर में स्थित था। दक्षिण समुद्र की स्थिति राजस्थान में थी। (४) गंगा-प्रदेश, हिमालय की तलहटी तथा असम के पर्वतीय प्रदेश उस समय समुद्र के अन्दर वर्तमान थे। भूगर्भवेत्ताओं का कथन है कि यह स्थिति लगभग ईसा से २५००० वर्ष पूर्व से लेकर ५०००० वर्ष पूर्व थी। ख- नारायणरावभवनराव पारंगी का मत : ऋग्वेद के रचनाकाल को निर्धारित करने के लिये भूगर्भशास्त्र के आधार पर तर्क प्रस्तुत करने वाले विद्वानों में श्री नारायणरावभवनराव पारंगी प्रमुख हैं। इन्होंने ऋग्वेद की रचना का काल ९००० वर्ष पूर्व निश्चित किया है। ऋग्वेद में अनेक भौगोलिक स्थितियों- नदियों, समुद्रों आदि का वर्णन है। इन भौगोलिक स्थितियों का वर्णन करने वाले प्रमुख मन्त्र हैं- ऋग्वेद १०/१३६/५, ९/३३/३ तथा १०/४७/२ आदि। इन मंत्रों में जिन स्थितियों का वर्णन है, भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार इस प्रकार की भौगोलिक स्थिति ९००० वर्ष पूर्व रही होगी। इसी आधार पर श्री पारङ्गी महोदय ने ऋग्वेद की रचना का समय ९००० वर्ष पूर्व का निर्धारित किया है। विन्टरनिट्ज का मत- प्रोफेसर विन्टरनिट्ज ने ज्योतिष विद्या पर आधारित तथ्यों को ही प्रधानता दी है। उन्होंने भाषा सम्बन्धी तथ्यों पर आधारित मतों को भी निरर्थक कहा है। उनके अनुसार वेदों का रचना काल २५०० ई०पू० से लेकर ५०० ई०पू० तक है। उपसंहार अनेक विद्वानों की यह भी मान्यता है कि ऋग्वेद की रचना यद्यपि ऋषियों का ही तत्त्व दर्शन है, तथापि यह वेद भी एक ही समय में नहीं रचा गया है। ऋग्वेद के कतिपय सूक्त पश्चातवर्ती हैं। कतिपय सूक्त अवान्तरकालीन रचना है। वेदमन्त्रों की रचना की एक परम्परा रही है तथा इनकी रचना निरन्तर होती रही। कालान्तर में इनका संकलन कर लिया गया। उपर्युक्त मतों की विशाल संख्या से यह तो स्पष्ट है कि अथक परिश्रम करने पर भी वेदों की रचना का समय आज भी निर्धारित नहीं हो सका है। वस्तुतः ऋग्वेद एवं अन्य वेदों की रचना के समय को पूर्णतः निश्चित करना लगभग असम्भव सा ही है। इनके काल को निर्धारित करने में वेदज्ञों ने शताब्दियों नहीं बल्कि सहस्राब्दियों का CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar

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