भारतकोश
वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान)

Vaidik Shiksha Paddhati and Gurukul System

डॉ. भास्कर मिश्र द्वारा

DevanagariHindipublished353 पृष्ठ

पृष्ठ 137, कुल 353 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 137

Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri द्वितीय अध्याय 109 (ब) ओल्डेन वर्ग का मत- इनका मत है कि वंशमण्डल की रचना के अनन्तर प्रथम तथा दशम मण्डल संलग्न किये गये। इन मण्डलों की भाषा, व्याकरण, छन्द, भाव तथा विवेच्य विषय अन्य मण्डलों की तुलना में नितान्त भिन्न तथा विकसित है। ओल्डेन वर्ग महोदय ने स्वयं कहा है- 'When we have once admitted the fact that the tenth maṇḍala of the Ṛgveda have gathered up the many periods and the original composition of the hymns was probably the work of several centuries, than we can distinguish earlier from later hymns.' (स) सुकठणकर का मत- इनका भी यही मत है कि ऋग्वेद की ऋचाओं में हम सरलता से प्राचीन तथा अर्वाचीन ऋचाओं को छांट सकते हैं क्योंकि इनकी रचना में शताब्दियों का अन्तर है। उनके अनुसार- The form in which the Saṁhitā of the Ṛgveda has comedown to us clearly shows the different hymns were composed long before. They were brought together and systematically arranged that the different portions of saṁhitā represent chronologically different stages flowed from various indications of language vocabulary, style grammar, matter and lastly ideas. The tenth maṇḍala is indeed the aggregate of supplementary hymns clearly showing their familiarity with the first nine. दशम मण्डल की अर्वाचीनता के विरोध में विद्वानों के मत- अधिकांश विद्वानों ने दशम मण्डल को अन्य मण्डलों की अपेक्षा नवीन स्वीकार किया है, किन्तु कुछ विद्वान् इस पौर्वापर्य को नहीं मानते। उनके अनुसार सम्पूर्ण ऋक्संहिता की रचना समकालिक है। इनमें पण्डित सत्यव्रत सामश्रमी तथा डॉ० कपिल देव द्विवेदी आदि प्रमुख हैं। इनके मत निम्नलिखित हैं- (क) पण्डित सत्यव्रत सामश्रमी का मत- पण्डित जी का कथन है कि ऋग्वेद के अष्टक क्रम में तो मण्डलों का नामोल्लेख तक नहीं दिखलाई पड़ता, इसलिए दशम मण्डल की रचना को अनन्तरकालीन कहना उचित नहीं है। उन्होंने अपने विचारों को इस प्रकार प्रस्तुत किया है- CC-0. Gurukul Kangri Collection, Haridwar

वैदिक शिक्षा पद्धति एवं गुरुकुल व्यवस्था (डॉ. भास्कर मिश्र - राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान) · पृष्ठ 137, कुल 353 में से · BharatKosha