वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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बुढ़ापे में तुष्णा ।
आप बूढ़े हो गये हैं, पर आपकी तुष्णा बूढ़ी नहीं हुई है । आप रात-दिन निस्संनय के फेर में लगे रहते हैं ! पूछ लूँ