वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
Devanagarihipublished648 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 150
बेरास्युहाटक
महात्मा कहते हैं—“सैया ! सव आपने मलबक्स प्रीति करते है । अगर निश्वास न हो तो फरीवा कर लो । पृष्ठ ६६
बहुँ आपनी सेवा-दहला कोर नाच- नखरुसि पलिको बरामि करती है ।
Popular Press—Calcutta.
पृष्ठ ६५