भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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पृष्ठ 152, कुल 648 में से

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वैराग्यशतक

लड़का ससल चढ़कर पड़ गया और मुर्छा सा हो गया । आवाज़ देने पर जब बह खासिको न आया ; खोने जाकर देखा और उसे मरा हुआ पाया । ( पृष्ठ ६५ )

झपार में पहलें रोना पिटना आरंभ कर दें; तो न जाने कब तक भूखी मरूँगी, हसीलिये पहले खीर खा लें और बचे सो बकि पर घर दूँ । ( पृष्ठ ६६ )

Popular Press—Calcutta.

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