भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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नेत्रभयशतक ३-६-६

शुद्धविषय योगभक्तिर ही एतः मन्त्रकर आकाशतन्त्री के शार त्या सकलै र् ।