भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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वैराग्यशतक ~~~~~

इती (२) ॥

एक

ता, न के

भौरा कमल में बँटा हुआ अनेक तरह के विचार करता है, हतने में हाथी आकर भौरा समेत कमल को खाजाता है। यही दशा हमारी है। हम रात-दिन विषय-भोगों में लगे रहते हैं और मृत्यु अचानक आकर हमें लील जाती है।

(पृष्ठ ३६६)