वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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वैराग्यशक्त ॥ ६ ॥
पुत्र स्त्री
— J. Banerjee —
संतुण की बुद्धावस्था बड़ी ख़तरनाक है। शरीर काम नहीं देता, स्त्रो सेवा नहीं करती—देखते ही आँखें निकालती है। पुत्र भी गजू हो जाते हैं।