वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
Devanagarihipublished648 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 57
वैराग्यगुरुक
एशिया की प्यारी देव्या उसी अमरकलश सेकर महादेव्या अनुहरि के सामने खड़ी है । वह उस कलशको महादेव्या को देवा कहती है ।