वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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वैराग्यशतक ~~~~~ ६
सभी स्वार्थ के सगे हैं। स्वार्थ बिना कोई किसी का नहीं। देखिये, फख्हीन वृक्षको पत्ती और जले हुए अंगल को हिरन त्याग रहे हैं। पृ० ४०० (शेष पुरतपर देखिये।)