भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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ॐ नमः शिवाय ॥ १ ॥

महाभारतकालीन अर्जुन को संसार से विरक्ति हो गई है ; धर्म राजशाही अनशीलन प्रभृति को दुःखदायक परिस्थिति कर कर ही आ रहे हैं ।