वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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सारतत्त्व
इस ग्रन्थके ४२६ पेजोंमें और करोड़ों वेदान्त-ग्रन्थोंमें जो विषय कहा गया है, उसे हम आधे श्लोकमें कह देते हैं:—
ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या, जीवो ब्रह्मेवनाऽपरः ।
ब्रह्म सत्य है, जगत् मिथ्या है और जीव ब्रह्मरूप है ।