वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १ )
ऐसा था बाँसुरीके बजैयाका बालपन । क्या-क्या कई मैं कृष्ण कन्हैयाका बालपन ॥२॥
आपने प्रेम-सम्बन्धी पुटककर शोरोंके सिवा “पेट,” “मनुष्य” “बचपन,” “बुढ़ापा,” “रोटी,” “संसार मिथ्या” बजारा नामा प्रभृति पर भी बड़ी ही मनोहर कवितायें लिखी हैं। आपकी ब्रह्मानन्द-सम्बन्धी कविता इसी पुस्तकके अन्तमें देखें। इस पुस्तकके प्रकाशित होनेके पहले शौक्रान आपकी कविताओं को तरसते थे। जब से यह पुस्तक छपी है, घड़ा-घड़ बिक रहो है। आप इसे अवश्य देखें। दाम १)
श्रियायत ।
जो सज्जन दाग, जोड़, गालिब और नज़ीर-चारों पुस्तके एक साथ माँगायेंगे, उन्हें ३) देने होंगे। डाकमहसूल १ पार्श्व न देना होगा।
उपन्यास-सम्राट्
हाजीबाबा ।
सम्पादक
भूतपूर्व वाइसराय लार्ड कर्जन महोदय ।
पृष्ठ-संख्या ३५०
चित्र-संख्या २४
यह रहस्य-पूर्ण उपन्यास हाल ही में छप कर तैय्यार हुआ