वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
Devanagarihipublished648 पृष्ठ
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भारतभूमि
शैप के मुख में मेंडक है, मौन में कमर नहीं है ; तथापि मेंडक मछली को खाया चाहता है ; बस यही हालत सनारी मोहाण्यों की है । वे हर नव्य मौत के मुख में रहते हुए भी, मेंडक की तरह विषकों को भोगने की चेष्टा करते हैं ।