वैराग्य शतक

वैराग्य शतक
Vairagya Shatak
भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा
स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)
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वैराग्यशतक ॥ ३ ॥
धन के लिये मैंने ब्रह्मनेक उपाय किये, जमीन खोदी, समुद्र में गोते लगाये, धातुएं कुर्की, रात-रात भर श्रमदान में सन्न जपे,—पर हाय ! मुझे एक कानी कौड़ी भी न मिली !