भारतकोश
वैराग्य शतक

वैराग्य शतक

Vairagya Shatak

भर्तृहरि (टीकाकार: हरिदास वैद्य) द्वारा

स्रोत: 1925 Haridas Vaidya edition · Haridas And Co., Kolkata / Digital Library of India · 1925 (उद्गम)

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संवाचशतक २४६

राशे के दुकानके लिये बसे खीका कपड़ा खींच रहे हैं। तुम शयनका देखकर पुरुषके दिलमें कौनो बदमा हो रही है। मंगल में भी ही सब दुःखोंकी कारण है।

पृ० २४४