भारतकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

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Digitized by Arya Samaj Foundation Chennai and eGangotri ६ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद ( रूप-स्पर्शाः ) १-रूप २ रस ३ गन्ध ४ स्पर्श ( संख्याः ) ५ संख्यायें ( परिमाणानि ) ६-नाप तोल आदि ( पृथक्त्वम् ) ७- पृथक् होना ( संयो- गविभागौ ) ८ संयोग और ९ वियोग ( परत्वाऽपरत्वे ) १० परे होना और ११ वरे होना ( बुद्धयः ) १२ बुद्धियें ( इच्छाद्वेषौ ) १३ इच्छा और १४ द्वेष ( च ) और ( प्रयत्नाः ) १५ अनेक प्रयत्न ( गुणाः ) ये गुण हैं ॥ पं० शङ्कर मिश्रकृत वैशेषिकसूत्रोपस्कार, पं० स्वामी हरिप्रसाद जी कृत वैशेषिकसूत्रवैदिकवृत्ति और पं० आर्यमुनिकृत वैशेषिकार्यभाष्यादि नये और पुराने भी सब टीकाकारों ने सूत्रस्थ ( च ) शब्द से १ गुरुत्व=भारीपन २- द्रवत्व=बहने वाला पतलापन ३ स्नेह=चिकनापन ४-संस्कार=वेगादि ५ धर्म ६ अधर्म और ७-शब्द; ये ७ गुण और मानकर सूत्र में कहे १५ गुणों सहित २२ गुण माने हैं ॥ नीचे लिखी कारिकाओं में जो वै० वै० वृत्ति में से उद्धृत हैं, कौन २ किस २ के गुण हैं, प्रकट होगा- स्पर्शादयोऽष्टौ वेगाख्यः संस्कारोमरुतोगुणाः । स्पर्शाद्यष्टौ रूपवेगौ द्रवत्वं तेजसोगुणाः ॥ १॥ स्पर्शादयोऽष्टौ वेगश्च द्रवत्वं च गुरुत्वकम् । रूपं रसस्तथा स्नेहो वारिएयेते चतुर्दश ॥ २ ॥ स्नेहहीना गन्धयुताः क्षितावेते चतुर्दश । बुद्ध्यादिषट्कं संख्यादि-पञ्चकं भावनां तथा ॥ ३ ॥ धर्माऽधर्मौ गुणाएते आत्मनः स्युश्चतुर्दश । संख्यादिपञ्चकं कालदिशोः शब्दश्च ते च खे ॥४॥ संख्यादिपञ्चकं बुद्धिरिच्छा यत्नोऽपि चेश्वरे । परत्वाऽपरत्वे संख्यादि पञ्च वेगश्च मानसे ॥ ५ ॥ अर्थ-स्पर्शादि ८-( स्पर्श १ संख्या २ परिमाण ३ पृथक्त्व ४ संयोग ५ वियोग ६ परत्व ७ अपरत्व ८) और ९ वां वेगनामक संस्कार; ये वायु के गुण हैं । स्पर्शादि ८ और ९ रूप, १० वेग और ११ द्रवत्व अग्नि के गुण हैं ॥ १ ॥ स्पर्शादि ८ और ९ वेग १० द्रवत्व ११ गुरुत्व १२ रूप १३ रस और १४ स्नेह; ये CC-0.Panini Kanya Maha Vidyalaya Collection.