भारतकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

पृष्ठ 104, कुल 160 में से

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१०० वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद अर्थात् ऊपर से छोड़ा हुवा जल, धारक पदार्थ के संयोग बिना भारी होने से पृथिवी की आकर्षणशक्ति से पृथिवी पर गिर पड़ता है ॥ ३ ॥ २०४-द्रवत्वात् स्यन्दनम् ॥ ४ ॥ ( द्रवत्वात् ) गीला और पतला होने से ( स्यन्दनम् ) नीचान में को बहाव होता है ॥ ४ ॥ प्रश्न-यदि गीला और पतला होने से जल नीचे को बहता है तो फिर समुद्र का जल मेघ में पहुंचने के लिये ऊपर कैसे चढ़ता है ? वह तो सदा नीचे ही को बहना चाहिये ? उत्तर- २०५-नाड्यवायुसंयोगादारोहणम् ॥ ५ ॥ ( नाड्यवायुसंयोगात् ) सूर्यकिरण और वायु के संयोग से [ जलों का ] ( आरोहणम् ) ऊपर को चढ़ाव होता है ॥ इस सूत्र से यह भी ध्वनि निकलती है कि यदि किसी नाड़ी ( नली ) में गर्मी भरी जावे और वह वायु को ऊपर को फेंके और फिर नीचे नली रिक्त होजावे तो अपने से छुए हुए पानी को ऊपर को खींचेगी ॥ ५ ॥ प्रश्न-सूर्य की किरण और वायु का संयोग के सिवाय कभी २ बिना सूर्य की किरणों के भी पानी ऊपर को चढ़ता देखा जाता है, जैसे फ़ौवारे में । सो क्यों ? उत्तर- २०६-नोदनापीडनात् संयुक्तसंयोगाच्च ॥ ६ ॥ ( नोदनापीडनात् ) धक्के और दबाव से ( च ) और ( संयुक्तसंयोगात् ) संयुक्त पदार्थ के संयोग से [ भी पानी ऊपर को उठता है ] ॥ २०७-वृक्षाभिसर्पणमित्यदृष्टकारितम् ॥ ७ ॥ ( इति ) यह ( अदृष्टकारितम् ) अदृष्ट वृक्षस्थ जीव शक्ति का कराया हुवा काम है कि ( वृक्षाभिसर्पणम् ) वृक्ष की ओर पानी का खिंच जाना ॥ वृक्ष की जड़ में दिया हुवा पानी जो ऊपर को वृक्ष के पत्र और शाखाओं में पहुंच जाता है, उस का कारण वह अदृष्ट शक्ति है जो जीवित वृक्ष में परमात्मा ने छिपी हुई रक्खी है ॥ ७ ॥ और- २०८-अपां संघातो विलयनञ्च तेजःसंयोगात् ॥ ८ ॥ ( अपाम् ) जल का ( संघातः ) जमाव ( च ) और ( विलयनम् ) गलकर पतला होजाना ( तेजःसंयोगात् ) तेज के संयोग से होता है ॥