वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya
महर्षि कणाद द्वारा
स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्रत्येक अणु अर्थात सूक्ष्मपदार्थ की उपलब्धि नहीं होती और महत् पदार्थ की उपलब्धि होती है, यह उपलब्ध और अनुपलब्ध होना सार्व- कालिक नित्य है ॥ ८ ॥ २६८—कारणबहुत्वाच्च ॥ ६ ॥ (कारणबहुत्वात्) बहुत कारणों के होने से (च) भी महत् पदार्थ में महत्त्व=बड़ापन होजाता है ॥ ९ ॥ २६९—अतोविपरीतमणु ॥ १० ॥ (अतः) इस से (विपरीतम्) विरुद्ध (अणु) परमाणु रूप लघुपदार्थ में महत्त्व=बड़ा पन नहीं होता ॥ १० ॥ २७०—अणु महदिति तस्मिन् विशेष- भावाद्विशेषाऽभावाच्च ॥ ११ ॥ (अणु) छोटा (महत्) बड़ा (इति) यह व्यवहार (तस्मिन्) उस पदार्थ में (विशेषभावात्) विशेष होने से (च) और (विशेषाऽभावात्) विशेष न होने से भी होता है ॥ एक ही पदार्थ को दूसरे पदार्थ की अपेक्षा से छोटा कहसकते हैं और उसी को तीसरे पदार्थ की अपेक्षा से बड़ा भी कह सकते हैं। जैसे—एक ही आंवला (आमलकीफल) बिल्व से छोटा और गेहूँ से बड़ा कहाता है ॥११॥ २७१—एककालत्वात् ॥ १२ ॥ (एककालत्वात्) एक काल में होने से ॥ जिस काल में हम आंवले को बिल्व से छोटा कहते हैं,उसी एक काल में उसी आंवले को गेहूँ से बड़ा भी कहते हैं ॥ १२ ॥ २७२—दृष्टान्ताच्च ॥ १३ ॥ (च) और (दृष्टान्तात्) दृष्टान्त से भी सिद्ध है ॥ जैसा एक दृष्टान्त आंवले का पूर्व सूत्रों में दिया गया, ऐसे ही अन्य अनेक दृष्टान्त सर्वत्र देखे जाते हैं। जैसे गौ हाथी से छोटी और बकरी से बड़ी होती है, इत्यादि ॥ १३ ॥ प्रश्न—तो क्या छोटेपन का छोटापन और बड़ेपन का बड़ापन भी होता है ? उत्तर—नहीं, क्योंकि—