भारतकोश
वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

वैशेषिक दर्शन (कणाद सूत्र व हिन्दी भाष्य सहित)

Vaisheshika Darshana with Hindi Bhashya

महर्षि कणाद द्वारा

स्रोत: स्वामीमेशिन यन्त्रालय · स्वामीमेशिन यन्त्रालय (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished160 पृष्ठ

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१३८ वैशेषिकदर्शन-भाषानुवाद ३४५-अस्येदं, कार्यकारणसम्बन्धाऽवयवाद्भवति ॥ २ ॥ ( अस्य ) इस लिङ्गी का ( इदम् ) यह लिङ्ग है, ( च ) और ( कार्य- कारणसम्बन्धः ) कार्यकारणसम्बन्ध है, [ यह ज्ञान ] ( अवयवात् ) उदाह- रण रूप एक देश से ( भवति ) होता है ॥ २ ॥ ३४६-एतेन शाब्दं व्याख्यातम् ॥ ३ ॥ ( एतेन ) इस व्याख्यान से ( शाब्दम् ) शाब्दज्ञान भी ( व्याख्यातम् ) व्याख्यात होगया ॥ जिस प्रकार लिङ्गलिङ्गिसम्बन्धज्ञानपूर्वक लिङ्गज्ञानोत्पन्न लैङ्गिक ज्ञान की व्याख्या की गई है, इसी प्रकार शब्द और उस के अर्थ तथा सम्बन्ध के ज्ञानपूर्वक-शब्द ज्ञान से उत्पद्यमान=शाब्द ज्ञान का भी व्याख्यान समझ लेना चाहिये ॥ ३ ॥ ३४७-हेतुरपदेशो लिङ्गं प्रमाणं करणमित्यनर्थान्तरम् ॥४॥ ( हेतुः ) हेतु, ( अपदेशः ) अपदेश, ( लिङ्गं ) लिङ्ग, ( प्रमाणं ) प्रमाण और ( करणं ) करण ( इति ) ये ( अनर्थान्तरं ) एकार्थक हैं ॥ हेत्वादि शब्द इस शास्त्र में एकार्थक हैं ॥ ४ ॥ ३४८-अस्येदमिति बुद्ध्यपेक्षितत्वात् ॥ ५ ॥ ( अस्य ) इस लिङ्गी वा उस कार्य का ( इदं ) यह लिङ्ग वा कारण है, ( इति ) यह बात ( बुद्ध्यपेक्षितत्वात् ) बुद्धि की अपेक्षाकृत होने से [ हेतु आदि एकार्थक हैं ] ॥ ५ ॥ प्रत्यक्षज्ञान, लिङ्ग=अनुमान से ज्ञान और आप्तोपदिष्ट शब्द से ज्ञान, यह ३ प्रकार का ज्ञान परीक्ष पूर्वक बताया गया, आगे स्मृतिज्ञान की परीक्षा करते हैं:- ३४९-आत्ममनसोः संयोगविशेषात् संस्काराच्च स्मृतिः ॥६॥ ( आत्ममनसोः ) आत्मा और मन के ( संयोगविशेषात् ) विशेष संयोग से ( च ) और ( संस्कारात् ) संस्कार से (स्मृतिः) स्मरण=ज्ञान होता है ॥६॥ ३५०-तथा स्वप्नः ॥ ७ ॥ ( तथा ) इसी प्रकार=आत्मा और मन के संयोग विशेष तथा संस्कार से ( स्वप्नः ) स्वप्नज्ञान होता है ॥ ७ ॥