वैशेषिक दर्शन (प्रशस्तपाद भाष्य सहित)
Vaisheshika Darshan with Prashastapada Bhashya
महर्षि कणाद / महर्षि प्रशस्तपाद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत सीरीज · चौखम्बा संस्कृत सीरीज · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३९२ न्यायकन्दलीसंवलितप्रशस्तपादभाष्यम् [ गुणे विभाग- प्रशस्तपादभाष्यम् तन्तुवीरणयोर्वा संयोगे सति द्रव्यानुत्पत्तौ पूर्वोक्तेन विधानेनाश्रयविनाश- संयोगाभ्यां तन्तुवीरणविभागविनाश इति । अथवा (इस स्थिति में भी आश्रय के नाश से विभाग का नाश हो सकता है, जहाँ) तन्तु और वीरण (तृणविशेष) में संयोग होता है । इस संयोग से किसी द्रव्य की उत्पत्ति नहीं होती; क्योंकि यह विजातीय दो द्रव्यों का संयोग है । पहले कथित रीति के अनुसार आश्रय का विनाश और संयोग इन दोनों से तन्तु और वीरण के विभाग का नाश होता है । न्यायकन्दली समं विभागं करोत्येव, ततो विभागाच्च परमाणोराकाशसंयोगनिवृत्तावुत्तरसंयोगे सति तदाश्रितस्य कर्मणो विनाशो भवत्येव । समानजातीयसंयोगे सति द्रव्योत्पत्तावाश्रयविनाशाद् विभागकर्मणोर्विनाशः कथितः, सम्प्रति विजातीयसंयोगे द्रव्यानुत्पत्तौ संयोगाश्रयविनाशाभ्यां विभागविनाशं कथयति-तन्तु- वीरणयोर्वा संयोगे सतिद्रव्यानुत्पत्तौ पूर्वोक्तेन विधानेनेति । तन्त्वारम्भकांशौ कर्मोत्पत्ति- समकालं वीरणे कर्म, ततोंऽशुक्रियया अंशान्तराद् विभागो वीरणकर्मणा च तस्य विभज्य- मानावयवेन तन्तुना आकाशाद्देशेन च समं विभागः क्रियते, ततोंऽशुविभागादंशुसंयोगविनाशो को अवश्य ही उत्पन्न करती है । इसके बाद विभाग के द्वारा परमाणु और आकाश के संयोग के नष्ट हो जाने पर उत्तर संयोग के बाद परमाणु में रहनेवाली क्रिया का भी अवश्य विनाश होता है । (समानजातीय द्रव्यों के संयोग के रहने पर) द्रव्य की उत्पत्ति के बाद आश्रय के विनाश से विभाग और क्रिया दोनों का ही नाश अभी कहा गया है । अब विजातीय द्रव्यों के संयोग के रहने के कारण द्रव्य की उत्पत्ति न होने पर भी संयोग और आश्रय के विनाश, इन दोनों से विभाग का विनाश 'तन्तुवीरणयोर्वा संयोगे सति द्रव्यानुत्पत्तौ पूर्वोक्तेन विधानेन' इत्यादि सन्दर्भ के द्वारा कहा गया है । इसकी यही प्रक्रिया है कि तन्तु के उत्पादक अंशु में क्रिया की उत्पत्ति के समय ही वीरण (तृणविशेष) में भी क्रिया उत्पन्न होती है । इसके बाद अंशु की क्रिया से दूसरे अंशु के साथ उसका विभाग उत्पन्न होता है । वीरण की क्रिया से अवयव से विभक्त होते हुए तन्तु के साथ एवं आकाशादि देशों के साथ भी विभाग उत्पन्न होते हैं ।