भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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: there is a small vertical stroke, like 'क' or 'त्'? Wait, look at line 10: ह, र्य, भि, न्नै, का, श्र, य, then: There is a "क" with something on top, then "प्रीत्यनुकूल"! Wait, why would there be a "क" before प्रीति? In Nyaya/Vyakarana: कर्मप्रत्यय (आत्मनेपद in सेव्यते): "हर्यभिन्नैकाश्रय-क-प्रीति..."? Yes! "हर्यभिन्नैकाश्रयका या प्रीतिः, तदनुकूलः चैत्राभिन्नैकाश्रयको व्यापारः"! "हर्यभिन्नैकाश्रयिका प्रीतिः" or "हर्यभिन्नैकाश्रयका प्रीतिः"! Look at line 10: "हर्यभिन्नैकाश्रय क प्रीत्यनुकूल..." Wait, what is on top of that क? It's a repha? No, it's "हर्यभिन्नैकाश्रय-" then a letter, wait, let's look very closely: Is it "हर्यभिन्नैकाश्रयप्रीत्यनुकूल"? Wait, count the letters: 1: ह 2: र्य 3: भि 4: न्नै 5: का 6: श्र 7: य 8: ? (looks like 'क' with a small repha or hook: 'र्क'? No, 'क' with a stroke: