भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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top! Yes, हरिर्भक्तमभिलष्यति! Wait, why does it say हरिर्भक्तमभिलष्यति? Because in "हरिर्भक्तमभिलष्यति", Hari is the kartā, bhakti/bhakta is karma. If अभिलष् were रुच्यर्थ, then Hari (who is प्रीयमाण) would get संप्रदानत्व! Wait, the text says: "इत्यत्र संप्रदानसंज्ञापत्तिरिति" - so whoever is प्रीयमाण (Hari) would get sampradana! Yes, exactly: हरिर्भक्तमभिलष्यति!

Line 26: निधायाह-अनन्यकर्तृक इति ॥ विषयतया प्रीत्याश्रयाभिन्नकर्तृक इत्यर्थः ॥ नागेशस्तु 'अन्यकर्तृकः' इति

Line 27: पाठं कल्पयित्वा 'अभिलष्यतिकर्तृपेक्षया यदन्यद् अभिलषतिकर्म तत्कर्तृक इत्यर्थः' इत्याह ॥ हरिनिष्ठेति ॥ Wait, अभिलष्यतिकर्तृपेक्षया or अभिलषतिकर्तृपेक्षया? Let's look: अभिलष्यतिकर्तृपेक्षया - wait, अभिलष्यतिकर्तृपेक्षया or अभिलषति? Letters: भि ष्य ति `र्त्त