वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें, दृभ सन्दर्भे, etc. Wait, "दृभीत्यनुमृजूधातूनां"? No: Wait, could it be "दृभीत्यनु..." - wait, अनु + ऋजू? No, look at: "दृभीत्यनु..." wait, look at the letters: दृ - भी - त्य - नु - ब - न्ध - क... no. Let's read letter by letter: दृ (dṛ) भी (bhī) त्य (tya) नु (nu) मृ (mṛ) जू (jū) or षू (ṣū)? Wait: look at line 12: छृदीँ, line 15: दृभी, दृभ. Are they ईदित्? Yes: "छृदीँ" is ईदित् ("छृदीति । अस्य घृषादिपाठे फलं चिन्त्यम् । ईदित्करणादेव णिज्विकल्पसिद्धेः । तद्दीत्करणं "श्वीदितो निष्ठायाम्" इति निष्ठायामिण्निषेधार्थं क्रियते... एवं दृभीत्यनुमृजूधातूनां पाठो व्यर्थ एवेति बोध्यम् ॥" Wait, which roots are ईदित् in this context? Line 1: पूर (ईदित्त्वं निष्ठायाम्...) Line 12: छृदीँ Line 15: दृभी भये Line 1