भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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" or "ओ"? Wait, look at line 22: "पूर्वत्रासिद्धीये तन्निषेधात् ।" Then there is a footnote marker '३'. Then: "आर्रति" - wait, there is a repha? Let's look at the letters: आ + र् + र + ति? Wait, if ढ्रलोपे दीर्घ happens, it becomes आरति. If not, it is अर्रति. Wait, why does it have a wavy shape? Ah, look at the word: "३आर्रति" or "३आरति"? Wait, let's look at the next word: "४आरियति ।" Look at the footnote 4: "४ अरियृतीति ।" (or "४ अरियतीति ।"?) Let's read Footnote 4: "४ अरियृतीति । परत्वादन्तरङ्गत्वाच्च यणः पूर्वमेवेयङ् ॥" Wait! Footnote 4 says: "४ अरियृतीति ।" or "४ अरियतीति"? "परत्वादन्तरङ्गत्वाच्च यणः पूर्वमेवेयङ् ॥" Wait, if it's झि, after झि is अत्, we have अरि + ऋ + अत्. Should यण् happen to ऋ first, or इयङ् to अभ्यास? Footnote 4 explains: "परत्वादन्तरङ्गत्वाच्च यणः पूर्वमेवेय