वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें" ? Wait, could it be "साक्षात्साधुत्वेतरधर्मारोपग्राहकत्वं"? Let's look at the matra: Is it an e-matra on त्वा? No, it's त्वा with an e-matra: 'त्वे'? Wait, look at line 27: "एवं “साक्षात्साधुत्व अत्यन्ताप्राप्तकार्यसम्पादकत्वं विधित्वम् ॥" Notice how line 27 has a space between "साक्षात्साधुत्व" and "अत्यन्ताप्राप्त"! In line 28: Is it "साक्षात्साधुत्वेतरधर्मारोपग्राहकत्वं"? Wait, if विधित्वम् = "साक्षात्साधुत्व...", then अतिदेशत्वम् = "साक्षात्साधुत्वातिरिक्तधर्मारोपग्राहकत्वं" or "साक्षात्साधुत्वेतरधर्मारोपग्राहकत्वं" or "साक्षात्साधुत्वाद्धर्मारोपग्राहकत्वं"? Wait, look at: सा (sa) - क्षा (ksha) - त् (t) - सा (sa) - धु (dhu) - त्वा (tva) - त् (t) / द् (d) Wait, look at the word: Can you see 'नि'? No, look at: सा - क्षा - त् - सा - धु - त्वा - द्ध - र्मा - रो - प -