भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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" ? Letters: सि - द्धि - र्न (siddhirna) Then: न - त्व - स्या - सि - द्ध - त - या (natvasyasiddhataya) Ah! "सिद्धेर्न नत्वस्यासिद्धतया"! Let's look at the matra on 'द्ध': It has e-matra: "सिद्धेर्न" with repha on 'न'! Yes! "सिद्धेर्न नत्वस्यासिद्धतया"!

Line 30: "यण्वत्ताविरहात् ॥ ५ ग्रासकर्मकर्तृकस्येति । ग्रास एव कर्मकर्ता यस्येत्यर्थः । पिण्डीक्रियमाण"

Line 31: "ओदनादिर्घट्टा व्यञ्जनदध्यादिसम्बन्धेन स्वयमेव झटिति ग्रासतां प्राप्नोति तदैतदुदाहरणम् ॥ ६ ग्रासेति" Wait, "ओदनादिर्घट्टा" or "ओदनादिर्घा"? Look at line 31: "ओदनादिर्घृष्टो" or "ओदनादिर्घृष्टा"? Letters: ओ - द - ना - दि - र् (odanadir) then: घृ or घा or ध? It has 'घ' with 'ृ'? "घृष्टो"? No, "घृतव्यञ्जन-"!! YES! Look at the letters: घृ (ghri) - त (ta) - व्य - ञ्ज -