वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
DevanagariHindipublished835 पृष्ठ
पृष्ठ 517, कुल 835 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 517
कृदन्तोणादिप्रकरणम् । (४६७) रासः । यवासो दुरालभा । कृशेरानुक् । कृशानुः ॥ श्रः करन् ॥ उत्तरसूत्रे किद्ग्रहणा- दिह ककारस्य नेत्त्वम् ॥ शर्करा ॥ पुषः कित् ॥ पुष्करम् ॥ कलश्च ॥ पुष्कलम् ॥ गमेरिनिः ॥ गमिष्यतीति गमी ॥ आङि णित् ॥ आगामी ॥ भुवश्च ॥ भावी ॥ प्रे स्थः ॥ प्रस्थायी ॥ परमे कित् ॥ परमेष्ठी ॥ मन्थः ॥ मन्थतेरिनिः कित्स्यात् ॥ कित्त्वान्नकारलोपः । मन्थीः । मन्थानौ । मन्थानः ॥ पतस्थ च ॥ पन्थाः । पन्थानौ ॥ खजेराकः ॥ खजाकः पक्षी ॥ बलाकादयश्च ॥ बलाका । शलाका । पताका ॥ पिना- कादयश्च ॥ पातेरिस्त्वं नुम् च ॥ क्लीबपुंसोः पिनाकः स्याच्छूलशङ्करधन्वनोः । तड आघाते । तडाकः ॥ कषिदृषिभ्यामीकन् ॥ कषीका पक्षिजातिः । दृषी