भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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(d) joined to bhra: "द्भ्रमिः ॥"! बाहुलकाद्भ्रमिः! Because with samprasāraṇa: bhṛmiḥ. बाहुलकात् (no samprasāraṇa): bhramiḥ! "बाहुलकाद्भ्रमिः ॥" Line 17 end: "बाहुलका-" Line 18 start: "द्भ्रमिः ॥" Brilliant!

Now let's check the sutra in line 18: "क्रमितमिशतिस्तम्भामत इच्च ॥ क्रिमिः । सम्प्रसारणानुवृत्तेः कृमिरपि ।" Roots: क्रम्, तम्, शम् (शति?), स्तम्भ् (स्तम्भाम्?). Wait, look at the sutra: "क्रमितमिशतिस्तम्भामत इच्च ॥" Wait, 'शति' or 'शमि'? Look at line 18: "क्र मि त मि श ति स्त म्भा म त" Wait, is it "शमि"? Look at the letter: it has 'श' then 'ति' or 'मि'? Wait, in "क्रमितमिशमीस्तम्भां"? Look at the image: "क्र मि त मि श ति" - wait, look at 'त' vs 'म': in 'तमिशति', the second is clearly 'त'? No, look at line 18: "क्र मि त मि श म्भि"? Let's