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वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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प्लुतो विकल्प्यते ॥ अप्लुतवदुपस्थिते ।६।१।१२९ ॥ उपस्थितोऽनार्ष इतिश- ब्दस्तस्मिन्परे प्लुतोऽप्लुतवद्भवति । अप्लुतकार्यं यणादिकं करोतीत्यर्थः । सुश्लोक ३ इति ।

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Let's check the header: अच्संधिप्रकरणम् । ( १३ )

Everything is fully verified and accurate.हरी एतावित्यादावेवमेव प्रकृतिभावो यथा स्यादिकोऽसवर्णे इति ह्रस्वसमुच्चितो मा भूत् ॥ इकोऽसवर्णे शाकल्यस्य ह्रस्वश्च ॥६।१।१२७॥ पदान्ता इकोऽसवर्णेऽचि परे प्रकृत्या स्युर्ह्र- स्वश्च वा । अत्र ह्रस्वविधिसामर्थ्यादेव प्रकृतिभावे सिद्धे तदनुकर्षणार्थश्चकारो न कर्तव्य इति भाष्ये स्थितम् ॥ चक्रि अत्र । चक्र्यत्र ॥ पदान्ता इति किम् ? गौर्यौ ॥ न समासे * ॥ वाप

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