वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८ ) अष्टाध्यायी-
धान्यानां भवने क्षेत्रे खञ् ॥ १ ॥ व्रीहिशाल्योर्ढक् ॥ २ ॥ यवयवकषष्टिकाद्यत् ॥ ३ ॥ विभाषा तिलमाषोमाभङ्गाणुभ्यः ॥ ४ ॥ सर्वचर्मणः कृतः खखञौ ॥ ५ ॥ यथामुखसंमुखस्य दर्शनः खः ॥ ६ ॥ तत्सर्वादेः पथ्यङ्गकर्मपत्रपात्रं व्याप्नोति ॥ ७ ॥ आप्रपदं प्राप्नोति ॥ ८ ॥ अनुपदसर्वान्नायानयं बद्धामक्षयतिनेयेषु ॥ ९ ॥ परोवरपरंपरपुत्रपौत्रमनुभवति ॥१०॥ अवारपारात्यन्तानुकामंगामी ॥११ ॥ समांसमां विजायते ॥ १२ ॥ अद्यश्वीनावष्टब्धे ॥ १३ ॥ आगवीनः ॥१४॥ अनुग्वलंगामी ॥१५ ॥ अध्वनो यत्खौ ॥ १६॥ अभ्यमित्राच्छ च ॥१७॥ गोष्ठात्खञ् भूतपूर्वे ॥१८॥ अश्वस्यैकाहगमः ॥१९ ॥ शालीनकौपीने ऽधृष्टाकार्ययोः ॥२०॥१॥ व्रातेन जीवति ॥ २१ ॥ साप्तपदीनं सख्यम्