भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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( ४६ ) अष्टाध्यायी- कुहोश्चुः ॥६२॥ न कवतेर्यङि ॥६३॥ कृषश्छन्दसि ॥६४॥ दाधर्तिदर्धर्तिदर्दधर्षीबोभूतुते- तिक्तेऽलर्ष्यापनीफणत्संसनिष्यदत्करिक्रत्कनिक्रदद्भरिभ्रद्विध्वतो दविद्युतत्तरित्रतः सरीसृपतं वरीवृजन्मर्मृज्यागनीगन्तीति च ॥ ६५ ॥ उरत् ॥ ६६ ॥ द्युतिस्वाप्योः संप्रसारणम् ॥ ॥ ६७ ॥ व्यथो लिटि ॥ ६८ ॥ दीर्घ इणः किति ॥६९॥ अत आदेः ॥७०॥ तस्मान्नुड् द्विहलः ॥ ७१ ॥ अश्नोतेश्च ॥ ७२ ॥ भवतेरः ॥ ७३ ॥ ससूवेति निगमे ॥ ७४ ॥ निजां त्रयाणां गुणः श्लौ ॥ ७५ ॥ भृञामित् ॥ ७६ ॥ अर्तिपिपर्त्योश्च ॥ ७७ ॥ बहुलं छन्दसि ॥ ७८ ॥ सन्यतः ॥ ७९ ॥ ओः पुयण्ज्यपरे ॥८०॥४॥ स्रवतिशृणोतिद्रवतिप्र