वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंद्वितीयोऽध्यायः । (५५) अर्धर्चाः पुंसि च । २ । ४ । ३१ ॥ अर्धर्च गोमय कषाय कार्षापण कुतप कुसप (कुणप) कपाट शङ्ख गूथ यूथ ध्वज कबन्ध पद्म गृह सरक कंस दिवस यूष अन्धकार दण्ड कमण्डलु मण्ड भूत द्वीप द्यूत चक्र धर्म कर्मन् मोदक शतमान याननख नखर चरण पुच्छ दाडिम हिम रजत सक्तु पिधान सार पात्र घृत सैन्धव औषध आढक चषक द्रोण खलीन पात्रीव षष्टिक वारबाण (वारवारण) प्रोथ कपित्थ [शुष्क] शालूक शील शुक्ल (शुल्क) शीधु कवच रेणु [ऋण] कपट शीकर मुसल सुवर्ण वर्ण पूर्व चमस क्षीर कर्ष आकाश अष्टापद मङ्गल निधन निर्यास जृम्भ वृत्त पुस्त बुस्त क्ष्वेडित शृङ्ग निगड [खल] मूलक मधु मूल स्थूल शराव नाल वप्र विमान मुख प्रग्रीव शूल वज्र कटक कण्टक [कर्पट] शिखर कल्क [वल्कल] नटमक [नाटमस्तक] वलय कुसुम तृण पङ्क कुण्डल किरीट [कुमुद] अर्बुद अङ्कुश तिमिर आश्रय भूषण इक्षस [इष्वास] मुकुल वसन्त तटाक [तडाग] पिटक विटंक विडङ्ग पिण्याक माष कोश फलक दिन दैवत पिनाक समर स्थाणु अनीक उपवास शाक कर्पास [विशाल] चषाल [चखाल] खण्ड दर विटप [रण बल मक] मृणाल हस्त आर्द्र हल [सूत्र] ताण्डव गाण्डीव मण्डप पटह सौध योध पार्श्व शरीर फल [छल] पुर [पुरा] राष्ट्र अम्बर बिम्ब कुट्टिम मण्डल [कुक्कुट] कुडप ककुद खण्डल तोमर तोरण मञ्चक पञ्चक पुङ्ख मध्य [बाल] छाल वल्मीक वर्ष वस्त्र वसु देह उद्यान उद्योग स्नेह स्तेन [स्तन स्वर] संगम निष्कक्षेम शूक क्षत्र पवित्र यौवन कलह मालक [पालक] मूषिक [मण्डल वल्कल] कुज [कुञ्ज] विहार लोहित विषाण भवन अरण्य पुलिन दृढ आसन ऐरावत शूर्प तीर्थ लोमन [लोमश] तमाल लोह दण्डक शपथ प्रतिसर दारु धनुस् मान वर्चस्क कूर्च तण्डक मठ सहस्र ओदन प्रवाल शकट अपराह्न नीड शकल तण्डुल ॥ इत्यर्धर्चादिः ॥ १८ ॥ पैलादिभ्यश्च । २ । ४ । ५९ ॥ पैल शालंकि सात्यकि सात्यकामि राहत्रि रावणि औदञ्जि औदव्रजि औदमेधि औदव्यञ्जि (औदमञ्जि) औदमृञ्जि दैवस्थानि पैङ्ग- लौदायनि राहक्षति मौलिङ्गि राणि औदन्य औद्राहमानि औञ्जिहानि औदशुद्धि तद्राजा- ण्णानः (तद्राज) ॥ आकृतिगणोऽयम् । इति पैलादिः ॥ १९ ॥ न तौल्वलिभ्यः । २ । ४ । ६१ ॥ तौल्वलि धारणि पारणि रावणि दैलीपि दैवति वार्कलि नैवति (नैवकि) देवमित्रि (दैवमति) दैवयज्ञि चाफट्कि बैल्वकि वैकि (वैंकि) आनुहारति (आनुराहति) पौष्करसादि आनुरोहति आनुति प्रादोहनि नैमिश्रि प्राडाहति बान्धकि वैशीति आसिनासि आर्हिंसि आसुरि नैमिषि आस्विबन्धकि पौष्णि कारेणु- पलि वैकर्णि वैरकि वैहति ॥ इति तौल्बल्यादिः ॥ २० ॥ यस्कादिभ्यो गोत्रे । २ । ४ । ६३ ॥ यस्क लह्य द्रुह्य अयस्थूण [अयःस्थूण] तृणकर्ण सदामत्त कम्बलहार बहिर्योग कर्णाढक पर्णाढक पिण्डीजंघ वक्रसक्थ [वकसक्थ] विश्रि कुद्रि अजवस्ति मित्रयु रक्षोमुख जंघारथ उत्कास कटुक मथक [मन्थक] पुष्करट