वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)
Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary
भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचतुर्थोऽध्यायः । (६१) कदूरक तक्षन् ऋष्टिषेण गङ्गा विपाश यस्क लह्व दुह्व अयस्थूण तृणकर्ण ( तृण कर्ण ) पर्ण भलन्दन विरूपाक्ष भूमि इला सदत्नी । द्व्यचो नद्याः ॥ त्रिवेणी त्रिवणं च ॥ इति शिवादिः । आकृतिगणः ॥ १६ ॥ शुभ्रादिभ्यश्च । ४ । १ । १२३ ॥ शुभ्र विष्ट पुर ( विष्टपुर ) ब्रह्मकृत शतद्वार शलाथल शलाकाभ्र लेखाभू ( लेखाभ्र ) विकसा ( विकास ) रोहिणी रुहिणी धर्मिणी दिग् शाळूक अजवस्ति शकन्धि विमातृ विधवा शुक विश देवतर शकुनि शुक्र उम्र ज्ञातल ( शतल ) बन्धकी सृकण्डु विश्रि अतिथि गोदन्त कुशाम्ब मकटु शाताहर पवटुरिक सुनामन् । लक्ष्मणस्यामयोर्वासिष्ठे । गोवा कृकलास अणीव प्रवाहण भरत ( भारत ) भरम मृकण्डु कर्पूर इतर अन्यतर आलीढ सुदन्त सुदक्ष सुवक्षस् सुदामन् कद्रू तुद अकशाय कुमारिका कुठारिका किशोरिका अम्बिका जि