भारतकोश
वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

वैयाकरण सिद्धान्त कौमुदी (भट्टोजि दीक्षित - बालमनोरमा व तत्त्वबोधिनी टीका सम्पूर्ण पूर्वार्ध)

Vaiyakarana Siddhanta Kaumudi of Bhattoji Dikshita with Commentary

भट्टोजि दीक्षित (टीकाकार: वासुदेव दीक्षित एवं ज्ञानेन्द्र सरस्वती) द्वारा

DevanagariHindipublished835 पृष्ठ

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/tu-kṣu). It is indeed टुक्षु!

Let's check line 6: ऊर्णुञ् आच्छादने ॥ उदात्त उभयतोभाषः ॥ ३० द्यु अभिगमने । ३१ षु प्रसवैश्वर्ययोः । Wait, "३० द्यु अभिगमने": Let's check Dhatupatha: root 30 of Adadi is "द्यु अभिगमने" (or "यु अभिगमने" already occurred at 23). Yes, 23 is यु मिश्रणेऽमिश्रणे च, and 30 is द्यु अभिगमने. Line 7 says "द्युप्रभृतयोऽनुदात्ताः". So it is definitely "द्यु"!

Let's check line 15: उदात्ता उदात्तेतः परस्मैभाषाः ॥ ५८ ञिष्वप् शये ॥ उदात्तः परस्मैभाषः॥ ५९ श्वस Wait, look at "५८ ञिष्वप्": Wait, is it ञिष्वप् or जिष्वप्? Look at the character: it really is shaped like 'जि' or 'ञि'? Wait, look at 'जि' in line 1: पिजि. Look at 'जि' in line 2: पृजि, वृजि. Look at 'जि' in line 15: "५८ जिष्वप्" - wait, in line