वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)
Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary
भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें"? No, why would it be "अक्षरस्य"? Wait, what if it is: "अक्षरम्—अविभक्तककारादिवर्णरूपाया"? No, look: यद् अक्षरम्— Then: अ (a) क्ष (ksha) र (ra) Then: स्य (sya)?? Wait, could it be: "अक्षरम्—अक्षरं न क्षरतीति"? No. Let's look really closely at: यद् अक्षरम्—अक्षरस्य विभक्तककारादिवर्णरूपाया Wait, could it be "अक्षरस्य विभक्तककारादिवर्णरूपाया"? Wait, in Hindi translation (line 18): "जो (ककारादिरूप) वर्णोंका कारण होते हुए भी" "वर्णों का कारण" = ककारादिवर्णरूपाया वैखर्या वाचो निमित्तम्! And in Sanskrit: "यद् अक्षरम्—अक्षरस्य विभक्तककारादिवर्णरूपाया वैखर्या वाचो निमित्तं, सत्" Wait, why "अक्षरस्य"? Wait! Could it be: "अक्षरम्—अक्षरं, विभक्तककारादिवर्णरूपाया वैखर्या वाचो निमित्तं सत्"? Look at the letter after 'र': Wait! Is it 'स्य'? Look: अ - क्ष - र - म् - ? Wait, it has a halanta 'म्'?