वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)

वाक्यपदीयम्: ब्रह्मकाण्ड (भर्तृहरि - शब्दब्रह्म, स्फोट-सिद्धान्त एवं भाषा-दर्शन सटीक)
Vakyapadiya Brahmakanda of Bhartrihari with Commentary
भर्तृहरि (टीकाकार: पं. सूर्यनारायण शुक्ल) द्वारा
DevanagariHindipublished192 पृष्ठ
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पि वागीशतामुपैति". In line 18, it's the same idea: by remembering him, mutes become masters of speech! "स्मरणाद् यस्य वागीन्द्रतां मूकाः प्रतिपेदिरे"? If it's: स्म-र-णाद् य-स्य वा-गीन्-द्र-तां मू-काः प्र-ति-पे-दि-रे Wait! That would be: स्म(1) र(2) णाद्(3) य(4) स्य(5) वा(6) गीन्(7) द्र(8) तां(9) मू(10) काः(11) प्र(12) ति(13) पे(14) दि(15) रे(16) = 16 syllables! A full half-verse (ardha-shloka) without division! Wait! 16 syllables total! 1 2 3 4 5 6 7 8 | 9 10 11 12 13 14 15 16: स्म(1) र(2) णाद्(3) य(4) स्य(5) वा(6) गीन्(7) द्र-(8) | तां(9) मू(10) काः(11) प्र(12) ति(13) पे(14) दि(15) रे(16