भारतकोश
वामन पुराण

वामन पुराण

Vamana Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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अध्याय १३] सुकेशिके प्रश्नके उत्तरमें ऋषियोंका जम्बू-द्वीपकी स्थिति और उनमें स्थित पर्वत तथा नदियोंका वर्णन ६९


संस्कृत श्लोकहिन्दी अनुवाद
औरसाश्चालिभद्राश्च किरातानां च जातयः।<br>तामसाः क्रममासाश्च सुपार्श्वाः पुण्ड्रकास्तथा॥ ४२<br>कुलूताः कुहुका ऊर्णास्तूणीपादाः सकुक्कुटाः।<br>माण्डव्या मालवीयाश्च उत्तरापथवासिनः ॥ ४३औरस, अलिभद्र, किरातोंकी जातियाँ, तामस, क्रममास, सुपार्श्व, पुण्ड्रक, कुलूत, कुहुक, ऊर्ण, तूणीपाद, कुक्कुट, माण्डव्य एवं मालवीय — ये जातियाँ$^*$ उत्तर भारतमें निवास करती हैं॥ ३७—४३॥
अङ्गा वङ्गा मुद्गरवास्त्वन्तर्गिरिबहिर्गिराः।<br>तथा प्रवङ्गा वाङ्गेया मांसादा बलदन्तिकाः॥ ४४<br>ब्रह्मोत्तरा प्राविजया भार्गवाः केशवर्वराः।<br>प्राग्ज्योतिषाश्च शूद्राश्च विदेहास्ताम्रलिप्तकाः ॥ ४५<br>माला मगधगोनन्दाः प्राच्या जनपदास्त्विमे।<br>पुण्ड्राश्च केरलाश्चैव चौडाः कुल्याश्च राक्षस॥ ४६<br>जातुषा मूषिकादाश्च कुमारादा महाशकाः।<br>महाराष्ट्रा माहिषिकाः कालिङ्गाश्चैव सर्वशः ॥ ४७<br>आभीराः सह नैषीका आरण्याः शबराश्च ये।<br>वलिन्ध्या विन्ध्यमौलेया वैदर्भा दण्डकैः सह॥ ४८<br>पौरिकाः सौशिकाश्चैव अश्मका भोगवर्द्धनाः।<br>वैषिकाः कुन्दला आन्ध्रा उद्भिदा नलकारकाः।<br>दाक्षिणात्या जनपदास्त्विमे शालकटङ्कट ॥ ४९अङ्ग (भागलपुर), वंग एवं मुद्गरव (मुंगेर), अन्तर्गिरि, बहिर्गिरि, प्रवङ्ग, वाङ्गेय, मांसाद, बलदन्तिक, ब्रह्मोत्तर, प्राविजय, भार्गव, केशवरावर, प्राग्ज्योतिष, शूद्र, विदेह, ताम्रलिप्तक, माला, मगध एवं गोनन्द — ये पूर्वके जनपद हैं। हे राक्षस! शालकटंकट! पुण्ड्र, केरल, चौड, कुल्य, जातुष, मूषिकाद, कुमाराद, महाशक, महाराष्ट्र, माहिषिक, कालिङ्ग (उड़ीसा), आभीर, नैषीक, आरण्य, शबर, वलिन्ध्य, विन्ध्यमौलेय, वैदर्भ, दण्डक, पौरिक, सौशिक, अश्मक, भोगवर्द्धन, वैषिक, कुन्दल, अन्ध्र, उद्भिद एवं नलकारक — ये दक्षिणके जनपद हैं॥ ४४—४९॥
शूर्पारका कारिवना दुर्गास्तालीकटैः सह।<br>पुलीयाः ससिनीलाश्च तापसास्तामसास्तथा ॥ ५०<br>कारस्करास्तु रमिनो नासिक्यान्तरनर्मदाः।<br>भारकच्छा समाहेयाः सह सारस्वतैरपि ॥ ५१<br>वात्सेयाश्च सुराष्ट्राश्च आवन्त्याश्चार्बुदैः सह।<br>इत्येते पश्चिमाशाशां स्थिता जानपदा जनाः॥ ५२<br>कारूषाश्चैकलव्याश्च मेकलाश्चोत्कलैः सह।<br>उत्तमर्णा दशार्णाश्च भोजाः किंकवरैः सह॥ ५३<br>तोशलाः कोशलाश्चैव त्रैपुराश्चैल्लिकास्तथा।<br>तुरुसास्तुम्बराश्चैव वहनाः नैषधैः सह॥ ५४<br>अनूपास्तुण्डिकेराश्च वीतहोत्रास्त्ववन्तयः।<br>सुकेशे विन्ध्यमूलस्थास्त्विमे जनपदाः स्मृताः॥ ५५सुकेशि! शूर्पारक (बम्बईका क्षेत्र), कारिवन, दुर्ग, तालीकट, पुलीय, ससिनील, तापस, तामस, कारस्कर, रमी, नासिक्य, अन्तर, नर्मद, भारकच्छ, माहेय, सारस्वत, वात्सेय, सुराष्ट्र, आवन्त्य एवं अर्बुद — ये पश्चिम दिशामें स्थित जनपदोंके निवासी हैं। कारूष, एकलव्य, मेकल, उत्कल, उत्तमर्ण, दशार्ण, भोज, किंकवर, तोशल, कोशल, त्रैपुर, ऐल्लिक, तुरुस, तुम्बर, वहन, नैषध, अनूप, तुण्डिकेर, वीतहोत्र एवं अवन्ती — ये सभी जनपद विन्ध्याचलके मूलमें (उपत्यका — तराईमें) स्थित हैं॥ ५०—५५॥
अथो देशान् प्रवक्ष्यामः पर्वताश्रयिणस्तु ये।<br>निराहारा हंसमार्गाः कुपथास्तङ्गणाः खशाः॥ ५६<br>कुथप्रावरणाश्चैव ऊर्णाः पुण्याः सहूहूकाः।<br>त्रिगर्ताश्च किराताश्च तोमराः शिशिराद्रिकाः॥ ५७<br>इमे तवोक्ता विषयाः सुविस्तराद्<br>द्विपे कुमारे रजनीचरेश।<br>एतेषु देशेषु च देशधर्मान्<br>संकीर्त्यमानाशृणु तत्त्वतो हि॥ ५८अच्छा, अब हम पर्वताश्रित प्रदेशोंके नामोंका वर्णन करेंगे। उनके नाम इस प्रकार हैं — निराहार, हंसमार्ग, कुपथ, तंगण, खश, कुथप्रावरण, ऊर्ण, पुण्य, हूहूक, त्रिगर्त, किरात, तोमर एवं शिशिराद्रिक। निशाचर! तुमसे कुमारद्वीपके इन देशोंका विस्तारसे हमलोगों ने वर्णन किया। अब हम इन देशोंमें वर्तमान देश-धर्मोंका यथार्थतः वर्णन करेंगे, उसे सुनो॥ ५६—५८॥

॥ इस प्रकार श्रीवामनपुराणमें तेरहवाँ अध्याय समाप्त हुआ॥ १३॥


$^*$ मनुस्मृति (८।४१) में भी जाति-जनपदादि धर्म मान्य हैं। इन्हें विस्तारसे समझनेके लिये 'जातिभास्कर' आदि देखना चाहिये।