भारतकोश
वामन पुराण

वामन पुराण

Vamana Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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[ ६ ]

क्रमाङ्कविषयपृष्ठ-संख्याक्रमाङ्कविषयपृष्ठ-संख्या
देवीकी स्तुति, देवीद्वारा वरदान और भविष्यमें प्रादुर्भावका कथन ....................................२४८और गणोंद्वारा मन्दरका भर जाना ....................३२३
५७-कार्तिकेयका जन्म, उनके छः मुख और चतुर्मूर्ति होनेका हेतु,उनका सेनापति होना तथा उनका गण, मयूर, शक्ति और दण्डादिका पाना ................२५५६८-भगवान् शंकरका अन्धकसे युद्धके लिये प्रस्थान, रुद्रगणोंका दानववर्गसे युद्ध और तुहुण्ड आदि दैत्योंका विनाश ......................................३२७
५८-सेनापतिपदपर नियुक्त कार्तिकेयके लिये ऋषियोंद्वारा स्वस्त्ययन, तारक-विजयके लिये प्रस्थान, पाताल-केतुका वृत्तान्त, तारक महिषासुर-वध तथा सुचक्राक्षको वर......................................२६२६९-शुक्रद्वारा संजीवनीका प्रयोग, नन्दि-दानव-युद्ध, शिवका शुक्रको उदरस्थ रखना, शुक्रकृत शिवस्तुति और विश्वदर्शन, प्रमथ-देवोंसे युद्धमें दैत्योंकी हार, शिव-वेशमें अन्धकका पार्वतीहेतु विफलप्रयास, पुनः दैत्य-देव और इन्द्र-जम्भ-युद्ध, मातलिकका जन्म और सारथ्य, दैत्योंका नाश, जम्भ-कुजम्भ-वध३३३
५९-ऋतध्वजका पातालकेतुपर आक्रमण कर प्रहार करना, अन्धकका गौरीको प्राप्त करनेके लिये प्रयत्न करना ........................................२७२७०-अन्धकका शिव-शूलसे भेदन, भैरवादिकी उत्पत्ति, अन्धककृत शिवस्तुति, अन्धकका भृङ्गित्त्व, देवादिकोंका भेजना, अर्द्धकुसुमसे पार्वतीका प्राकट्य और अन्धकद्वारा उनकी स्तुति ...........३४५
६०-पुनः तेजःप्राप्तिके लिये शिवकी तपश्चर्या, केदारतीर्थ-की उपलब्धि, शिवका सरस्वतीमें निमग्न होना, मुरासुरका प्रसङ्ग और सनत्कुमारका प्रसङ्ग .......२७६७१-इन्द्रका मलयपर असुरोंसे युद्ध, उनका 'पाकशासन' और 'गोत्रभिद्' होनेका हेतु; मरुतोंकी उत्पत्तिकी कथा .................................................३५३
६१-पुन्नाम नरकोंका वर्णन, पुत्र-शिष्यकी विशेषता एवं बारह प्रकारके पुत्रोंका वर्णन, सनत्कुमार-ब्रह्माका प्रसङ्ग, चतुर्मूर्तिका वर्णन और मुरु-वध ...........२८२७२-स्वायम्भुव, स्वारोचिष, उत्तम, तामस, रैवत, चाक्षुष-मन्वन्तरोंके मरुद्गणकी उत्पत्तिका वर्णन .................................................३५६
६२-शिवके अभिषेक और तप्त-कृच्छ्र-व्रतका उपदेश, हरि-हरके संयोगसे विष्णुके हृदयमें शिवकी संस्थिति, शुक्रको संजीवनी विद्याकी शिक्षा, मङ्कणकी कथा और सप्त सारस्वततीर्थका माहात्म्य२८८७३-बलि, मय-प्रभृति दैत्योंका देवताओंके साथ युद्ध, कालनेमिके साथ विष्णुभगवान्‌का युद्ध और कालनेमिका वध ......................................३६२
६३-अन्धकासुरका प्रसङ्ग, दण्डकाख्यानका कथन, दण्डकका अरजासे चित्राङ्गदाका वृत्तान्त-कथन...२९३७४-बलि-बाणका देवताओंसे युद्ध, बलिकी विजय, प्रह्लादका स्वर्गमें आना, बलिको प्रह्लादका उपदेश३६६
६४-चित्राङ्गदा-सन्दर्भ, विश्वकर्माका बन्दर होना, वेदवती आदिका उपाख्यान, जाबालिका बन्धन-मोचन.......................................२९९७५-त्रैलोक्य-लक्ष्मीका बलिके यहाँ आना, श्वेत लक्ष्मी आदिकी उत्पत्ति, निधियोंका वर्णन, जयश्रीका बलिमें मिलना और बलिकी समृद्धिका वर्णन ....३७०
६५-गालव-प्रसङ्ग, चित्राङ्गदा-वेदवती-वृत्तान्त, कन्याओंकी खोज, घृताची-वृत्तान्त, जाबालिकी जटाओंसे मुक्ति, विश्वकर्माकी शाप-मुक्ति, इन्द्रद्युम्नादिका सप्तगोदावरमें आना, शिव-स्तुति, सप्तगोदावरमें सम्मेलन, कन्याओंका विवाह ......३०४७६-प्रायश्चित्त-हेतु इन्द्रकी तपस्या, माताके आश्रममें आना, अदितिकी तपस्या और वासुदेवकी स्तुति, वासुदेवका अदितिके पुत्र बननेका आश्वासन और स्वतेजसे अदितिके गर्भमें प्रवेश ................३७४
६६-दण्डक-अरजाके प्रसङ्गमें शुक्रद्वारा दण्डकको शाप, प्रह्लादका अन्धकको उपदेश और अन्धक-शिव-सन्दर्भ ................................................३१७७७-प्रह्लादसे अदितिके गर्भमें विष्णुके प्रविष्ट होनेकी बात जानकर बलिका विष्णुको दुर्वचन, प्रह्लादद्वारा बलिको शाप और अनुनय करनेपर उपदेश .................३७८
६७-नन्दिद्वारा आहूत गणोंका वर्णन, उनसे हरि और हरका एकत्व प्रतिपादन, गणोंको सदाशिवका दर्शन७८-प्रह्लादकी तीर्थयात्रा, धुन्धु और वामन-प्रसङ्ग, धुन्धुका यज्ञानुष्ठान, वामनका प्रादुर्भाव और उनके लिये दान