वामन पुराण

वामन पुराण
Vamana Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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| क्रमाङ्क | विषय | पृष्ठ-संख्या | क्रमाङ्क | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| देनेका धुन्धुका निश्चय, वामनका त्रिविक्रम होना और धुन्धुका वध .................. | ३८३ | ८८- | बलिको कुरुक्षेत्रमें आना, वहाँके मुनियोंका पलायन, वामनका आविर्भाव, उनकी स्तुति, बलिके यज्ञमें जानेकी उत्कण्ठा और भरद्वाजसे स्वस्थानका कथन .................................. | ४३४ | |
| ७९- | पुरूरवाको रूपकी प्राप्ति और उसी सन्दर्भमें प्रेत और वणिक्की भेंट तथा परस्पर वृत्तान्तका कहना एवं श्रवण-द्वादशीका माहात्म्य, गयामें श्राद्ध करनेसे प्रेत-योनिसे मुक्ति और पुरूरवाको सुरूपकी प्राप्ति | ३९० | ८९- | वामनभगवान्का विविध स्थानोंमें निवास-वर्णन और कुरुजाङ्गलके लिये प्रस्थान करना ........... | ४३९ |
| ८०- | नक्षत्र-पुरुषके वर्णन-प्रसङ्गमें नक्षत्र-पुरुषकी पूजाका विधान और नक्षत्र-पुरुषके व्रतका माहात्म्य ....... | ३९६ | ९०- | भगवान् वामनके आगमनसे पृथ्वीकी क्षुब्धता, बलि और शुक्रके संवाद-प्रसङ्गमें कोशकारकी कथा .................................................... | ४४३ |
| ८१- | प्रह्लादकी आनुक्रमिक तीर्थयात्राका वर्णन और जलोद्भवका आख्यान............................... | ३९९ | ९१- | वामनकी बलिके यज्ञमें जाकर उससे तीन पग भूमिकी याचना, वामनका विराद्रूप ग्रहण करना एवं त्रिविक्रमत्व, वामनका बलिबन्धन-विषयक प्रश्न, बलिको वर, बलिका पाताल और वामनका स्वर्ग-गमन ............................................ | ४५३ |
| ८२- | चक्रदानके कथा-प्रसङ्गमें उपमन्यु तथा श्रीदामाका वृत्तान्त, शिवद्वारा विष्णुको चक्र देना, हरका विरूपाक्ष हो जाना और श्रीदाम-वध ............. | ४०२ | ९२- | ब्रह्मलोकमें वामनभगवान्की पूजा, ब्रह्मकृत वामनकी स्तुति और वामनरूपमें विष्णुका स्वर्गमें निवास ......................................... | ४५९ |
| ८३- | प्रह्लादकी अनुक्रमागत तीर्थ-यात्रामें अनेक तीर्थोंका महत्त्व ................................................... | ४०६ | ९३- | बलिका पातालमें वास, सुदर्शनचक्रका वहाँ प्रवेश, बलिद्वारा सुदर्शनचक्रकी स्तुति, प्रह्लादद्वारा विष्णुभक्तिकी प्रशंसा ............................. | ४६३ |
| ८४- | प्रह्लादके तीर्थयात्रा-प्रसङ्गमें त्रिकूटगिरिस्थित सरोवरमें ग्राहद्वारा गजेन्द्रका पकड़ा जाना, गजेन्द्रद्वारा विष्णुकी स्तुति, गज-ग्राहका उद्धार एवं 'गजेन्द्रमोक्षणस्तोत्र' की फलश्रुति ........... | ४११ | ९४- | बलिका प्रह्लादसे प्रश्न, विष्णुकी पूजनादि-विधि, मासानुसार विविध दान-विधान, विष्णु-मन्दिर-निर्माण और विष्णुभक्त एवं वृद्धवाक्यकी महिमाका वर्णन ..................................... | ४७० |
| ८५- | सारस्वतस्तोत्रके संदर्भमें विष्णुपञ्जरस्तोत्र, सारस्वतस्तव-कथन-प्रसङ्गमें राक्षस-वृत्तान्त, राक्षसग्रस्त मुनिकी अग्नि-प्रार्थना, सारस्वतस्तोत्र और मुनिद्वारा राक्षसको उपदेश................... | ४१८ | ९५- | पुराण-वाचन, श्रवण-श्रवण और पठनकी फलश्रुति ................................................. | ४७६ |
| ८६- | स्तोत्रोंके क्रममें पुलस्त्यजीद्वारा उपदिष्ट महेश्वर-कथित पापप्रशमनस्तोत्र........................... | ४२७ | |||
| ८७- | अगस्त्यद्वारा कथित पापप्रशमनस्तोत्र ................ | ४३२ |