वेद स्वरूप विमर्श (स्वामी करपात्री जी महाराज - अपौरुषेय वेद-प्रामाण्य एवं वैदिक समन्वय)
Veda Swaroop Vimarsha of Swami Karpatri Maharaj
धर्मसम्राट् स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाव-? No, रहितस्वभाव-! Ah! प्राणादिविकाररहितस्वभाव-Line 25 starts with:त्वात्orधारणात्? Wait! Look at the first word of line 25: त्वात्, श्रेष्ठशब्देन मुख्य एव प्राण उक्तः ।Wait, let's look atत्वात्vsधारणात्: Wait, look at line 25, first word: त्वात्, श्रेष्ठशब्देन मुख्य एव प्राण उक्तः । 'प्राणो वाव ज्येष्ठश्च श्रेष्ठश्च'Wait, look at the first letters of line 25:त्वात्? Wait, let's look at line 24 end: प्राणादिविकाररहितस्वभाव-And line 25 start:त्वात्, श्रेष्ठशब्देन मुख्य एव प्राणः उक्तः । 'प्राणो वाव ज्येष्ठश्च श्रेष्ठश्च'Wait, why did I seeधारणात्earlier? That was upside down misreading! It is clearly:त्वात्, श्रेष्ठशब्देन मुख्य एव प्राण उक्तः ।(orप्राणः उक्तः ।) Let's check if there is visarga on प्राण: प्राण उक्तःorप्राणः उक्तः`.
Line 26: `(छा० ५।१।१) इति श्रुतिनिर्देशात् शुक्रनिषेककालभावाच्च तस्य